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May 30, 20261 min
ये तुम्हारा घर नहीं...
ये तुम्हारा घर नहीं- कहानी फिर बोला , “मम्मी तुम वापस इंग्लैंड चली जाओ। ये तुम्हारा घर नहीं है।”

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May 30, 20261 min
अपनी भाषा अपने लोग
कलम इंदौर द्वारा आयोजित -अपनी भाषा अपने लोग प्रभा खेतान फाउंडेशन का आभार. https://www.youtube.com/watch?v=oB8D6T-5g7Q

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May 27, 20261 min
गीत
मन मन रूठा, मनाऊँ कैसे? सुरज का उगना, फूलों का खिलना, नदिया का बहना, झरने का झरना, संझा को धरती का सूरज से मिलना, मौसम बदलना दिखते हैं केवल कैलेंडर के पन्नों पर महीने बदलते, टिक-टिक टिक-टिक सुइयाँ सरकते, सौंधे से, भीने से, रिश्ते दरकते, मन रूठा, मनाऊँ कैसे? बचपन की गलियों में कुछ पल बिताकर, नानी के किस्सों में, निंदिया चुराकर आमों के, बेरों के, जंगल में छुपकर, बहलाकर-फुसलाकर नन्हें से मन को लौट आना पड़ता है फिर कारों की लंबी कतारों की दुनिया में, रोटी की मारामारी की दुनिया में,...

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