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ये तुम्हारा घर नहीं...
ये तुम्हारा घर नहीं- कहानी फिर बोला , “मम्मी तुम वापस इंग्लैंड चली जाओ। ये तुम्हारा घर नहीं है।”
vandanamsharma2
May 301 min read


अपनी भाषा अपने लोग
कलम इंदौर द्वारा आयोजित -अपनी भाषा अपने लोग प्रभा खेतान फाउंडेशन का आभार. https://www.youtube.com/watch?v=oB8D6T-5g7Q
vandanamsharma2
May 301 min read
गीत
मन मन रूठा, मनाऊँ कैसे? सुरज का उगना, फूलों का खिलना, नदिया का बहना, झरने का झरना, संझा को धरती का सूरज से मिलना, मौसम बदलना दिखते हैं केवल कैलेंडर के पन्नों पर महीने बदलते, टिक-टिक टिक-टिक सुइयाँ सरकते, सौंधे से, भीने से, रिश्ते दरकते, मन रूठा, मनाऊँ कैसे? बचपन की गलियों में कुछ पल बिताकर, नानी के किस्सों में, निंदिया चुराकर आमों के, बेरों के, जंगल में छुपकर, बहलाकर-फुसलाकर नन्हें से मन को लौट आना पड़ता है फिर कारों की लंबी कतारों की दुनिया में, रोटी की मारामारी की
vandanamsharma2
May 271 min read
सनद-ΣΑΝΑΔ :एक मुलाक़ात - एक शाम डॉ. वंदना मुकेश के नाम
श्री इंदुकांत आंगिरस जी स्वयं बहुभाषाविद्, बहुपठित साहित्यकार हैं। वे साहित्य, कला,और संगीत के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य के विकास के लिए अनेक- अनेक कार्य करते रहते हैं , और भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार करते हैं।। उनका अभिनंदन, आभार और शुभकामनाएँ। उनके मंच से साक्षात्कार के हए गिरमिटिया साहित्य विशेषज्ञ डॉ. दीप्ति अग्रवाल का आभार। https://www.youtube.com/watch?v=3FxIh92PD0s&t=938s
vandanamsharma2
May 271 min read
घर- कहानी
ये इंग्लैंड के घर भी कैसे होते हैं- किचन, ड्रॉंइंगरूम नीचे और बॅडरूम्स ऊपर। एक वक्त में घर के आधे हिस्से से पूरी तरह से कटे ही रहते हैं। वैसे तो इस बार की भारत यात्रा में पता चला कि रिश्तेदारों में ‘रो-हाऊसेज़’ तेजी से स्टेटस सिंबल का नया प्रतिमान बनते जा रहे हैं। खैर मुझे ये ‘रो-हाऊस’ कभी भी अच्छे नहीं लगे। बचपन से बड़े-बड़े, खुले-खुले बंगलों में रहने की जो आदत थी । लेकिन यहाँ तो बँगला बुढ़ापे का आवास माना जाता है।....... घर, परिवार के सदस्यों के आपसी प्रेम और सद्भाव से बन
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May 271 min read
हिंदी गानों से सीखें हिंदी-
पिछले साल वैश्विक हिंदी परिवार के मंच से ऑनलाईन शिक्षण का प्रकल्प आरंभ हुआ । इस मंच के माध्यम से मैंने भी हिंदी भाषा शिक्षण की ऑनलाईन कक्षाएँ दो माह तक सप्ताह में एक बार लीं। वह एक विलक्षण अनुभव था। इन कक्षाओं में थाईलैण्ड, कोरिया, त्रिनिदाद तथा मॉरीशस के छात्रों से बहुत उत्साह पूर्वक सीखा और मेरे भाषा शिक्षण की विशेष रूप से सहारना की। छात्रों से यह मिले आत्मीय प्रतिसाद से मन को बहुत संतुष्टि हुई। देखें यह वीडियो- https://www.youtube.com/watch?v=La4tBbvpqQo
vandanamsharma2
May 271 min read
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
इंग्लैण्ड से दो रचनाएँ समर्पित 1 प्रेम जब तक तुम/ मेरी बनाई/ लक्ष्मण-रेखा की परिधि से / बाहर रहोगे/ मैं/ तुम्हें/ प्रेम करती रहूँगी। 2 धूप से संवाद सुनो! अब/ तुम्हारी मनमानी नहीं चलने दूँगी मैं कैद कर लूँगी तुम्हें और जब मन चाहेगा/ बेरोकटोक/ अपने हिस्से की धूप लेती रहूँगी।
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Mar 81 min read
वैलेंटाईन डे
प्रेम होता है केवल प्रेम। ‘डेट’ नहीं, ‘गिफ्ट’ नहीं ‘डिनर’ नहीं ‘राइट स्वाईप’ भी नहीं प्रेम होता नहीं सदैव मुखर अपेक्षाओं से परे, प्रेम होता है मौन, त्याग, समर्पण, मित्रता प्रेम होता है केवल प्रेम 14.2.2026
vandanamsharma2
Feb 171 min read


'कहानी जानी अनजानी' पर सरोजरानियाँ
15 मार्च 2022 को टीम कहानी अनजानी हिंदी स्टोरी पॉ़डकास्ट से देवांशी बत्रा की ईमेल आती है कि उन्होंने मेरी कहानी...
vandanamsharma2
Aug 18, 20251 min read
पुल
उस पीढ़ी से इस पीढ़ी तक कई पुल बनने हैं। कुछ कदम तुम चलो, कुछ मैं। याद रखना, बनाओ जब पुल तो इनमें सरकारी सीमेंट न हो, दीवारों में सेंध...
vandanamsharma2
Mar 10, 20251 min read
वे
वे प्रतीक्षा कर रहे हैं , दरवाजे पर एक थाप की, पास आती पदचाप की—
अपने दूर जा चुके बच्चों की, किसी रिश्तेदार , किसी परिचित,
या फि,र सड़क से गुज़रने वाले किसी अजनबी की। सिर्फ़ एक "नमस्ते" सुनने के लिए, या मुस्कुराहट बुनने के लिए । वे कदमों की म द्धि म होती आहटों को देर तक सुनते हैं और अपने सूनेपन में लौट जाते हैं । Surprisingly, I wrote it in English first. Here is the original English version of the poem -Like an old lady, waiting for the approaching footsteps—
of her
vandanamsharma2
Mar 7, 20251 min read
केल्या शिवाय होत नाहीं
कुछ तो लिखना है । चलिए, लिखती हूँ कुछ- एक बड़ा घर है । बहुत सारे लोग रहते हैं । अपनी- अपनी पसंद के काम करते हैं । किसी को कोई रोकटोक नहीं...
vandanamsharma2
Feb 20, 20251 min read
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