पुल
- vandanamsharma2
- Mar 10
- 1 min read
उस पीढ़ी से इस पीढ़ी तक
कई पुल बनने हैं।
कुछ कदम तुम चलो,
कुछ मैं।
याद रखना,
बनाओ जब पुल तो
इनमें सरकारी सीमेंट न हो,
दीवारों में सेंध न हो।
बनाना तुम, लोहे की नींव
लगाना तुम, प्यार की सीमेंट
विश्वास की थापी से।
फिर देखना, आहिस्ता-आहिस्ता
बनेगा जो पुल ,
उसी पर से देखेंगे हम
उगते सूरज को साथ-साथ।
आज इन्हीं छोटे- छोटे पुलों की आवश्यकता है। भाषाओं के बीच , व्यक्तियों को बीच, समाजों के बीच,देशों के बीच..। रिश्ते -नाते , परिजन, पड़ोसी, यूक्रेन, रूस, सीरिया,इज़रायल, अफ्रीका... सभी के बीच पुल निर्मित हों।
'सर्वे भवन्तु सुखिन:। सर्वे संतु निरामयाः।सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चित दुःख भाग्भवेत्।।'
सार्वभौमिक सुख, नीरोग, कल्याण हो और कोई दुख का भागी न हो ,
भगवान से की गई यह प्रार्थना तभी फलीभूत हो सकती है।

Comments