अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस
इंग्लैण्ड से दो रचनाएँ समर्पित
1
प्रेम
जब तक तुम/ मेरी
बनाई/ लक्ष्मण-रेखा
की परिधि से /
बाहर रहोगे/
मैं/
तुम्हें/
प्रेम करती रहूँगी।
2
धूप से संवाद
सुनो!
अब/
तुम्हारी मनमानी नहीं चलने दूँगी
मैं
कैद कर लूँगी तुम्हें
और
जब मन चाहेगा/
बेरोकटोक/
अपने हिस्से की धूप लेती रहूँगी।



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