घर- कहानी
ये इंग्लैंड के घर भी कैसे होते हैं- किचन, ड्रॉंइंगरूम नीचे और बॅडरूम्स ऊपर। एक वक्त में घर के आधे हिस्से से पूरी तरह से कटे ही रहते हैं। वैसे तो इस बार की भारत यात्रा में पता चला कि रिश्तेदारों में ‘रो-हाऊसेज़’ तेजी से स्टेटस सिंबल का नया प्रतिमान बनते जा रहे हैं। खैर मुझे ये ‘रो-हाऊस’ कभी भी अच्छे नहीं लगे। बचपन से बड़े-बड़े, खुले-खुले बंगलों में रहने की जो आदत थी । लेकिन यहाँ तो बँगला बुढ़ापे का आवास माना जाता है।.......
घर, परिवार के सदस्यों के आपसी प्रेम और सद्भाव से बनता है। पारिवारिक मूल्यों की स्थापना करती एक भावपूर्ण कहानी सुनें प्रवासी दुनिया के मंच से स्पेन से पूजा अनिल के स्वर में-



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